जिन्दगी भी एक अजीब पहेली है दोस्तों हम बचपन से उसका हल ढूढने में लगे रहते है और इस ढूंढने के सफर में जो हमारे सात हो जाते हे वो दोस्त कहलाते है|
मंजिल क्या है किसी को पता नही रहता हम तो बस चलते जाते हे और याद रह जाते है तो बस इस सफर के दोस्तों के किस्से |
हमे भी एक सफर में एक दोस्त मिला “राकेश” इसके किस्से भी बड़े दिलचस्प है | 5.5inch हाईट वाला ,तेरे नाम हेयर स्टायल रखने वाला और मासूम सा दिखने वाला राकेश भी कमाल का इन्सान है| कक्षा में राकेश के आते ही जेसे करिश्मा हो जाता है और वो कम्बख्त पूछता आज करिश्मा नही आयी ? लडकियों के पीछे भागना तो उसकी फितरत में है लेकिन उसके लिए भी जिगरा चाहिए जो कि राकेश के पास ही है | कक्षा में आने के बाद कभी किसी कि हंसी बंद हो जाये सवाल ही नही उठता हम तो बस डरे हुए रहते कि अपना Control ना खो द|े “काली हो या गोरी बस मिलनी चाहिए छोरी” यह पंक्तिया उस पर सटीक बैठती है | बात चाहे लडकियों से सबके सामने बात करने कि हो या सबके सामने अपनी बात शायराना अंदाज में कहने कि हो ,फिर सामने क्या प्रिंसिपल ,क्या टीचर |या फिर बात प्रार्थना सभा मे सबके सामने लड़की को आँख मारने कि हिम्मत कि हो| ऐसे बड़े दिलवाले और हिम्मत वाले कामो में तो अपना यार NO.1 है NO.1
शायरी सुना सुना कर तो वो शायर कि उपाधि तो वो हासिल कर ही चूका है लेकिन उसकी शायरी में वो दर्द किसके लिए होता पता ही नही चलता हमारा तो वक्त इसी को जानने में निकल जाता है कि इसका यह दर्द एक के लिए है या अनेक के लिए खैर यह दर्द किसके लिए है यह तो वही जनता है|
उसके साथ कभी सफ़र पर निकल पड़े तो कयामत आ जाती है| हम तो इसी सोच में डुबे रहते है कि हम बस आराम से पहुँच जाये वरना ये किस लड़की को क्या बोल देगा और सबकी धुलाई करवा देगा और तो और उसे तो लडकियों के बॉलीवाल की मारने में भी सुकून मिलता है|
हर रोज उसकी नई कहानी भी सुननी पडती है| जिसका START और END DIFFERENT होता है|बस बीच वाला भाग है जो नही बदलता| यह भी कितनी सही होती है वो ही जाने |
यह हमें तकलीफ देता हे या चैन यह हमे नही पता होता पर उसके बिना हमे भी जग सुना लगता है| आखिर जैसा भी है ह तो अपना यार ही ना |
हरदम सबको हंसाने वाला
अपना राकेश निराला
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mxmyks@gmail.com
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